जलवायु परिवर्तन और चेन्नई में सैलाब…

| बड़ी ख़बरे महानगर
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पेरिस में भारत की चिंता और उसकी पहल को विश्व बिरादरी ने जहां तवज्जो दी वहीं अब समय आ गया है कि भारत की सार्थक पहल पर विकसित देशों के साथ साथ विकासशील देशो को काम करने की जरुरत है । क्योंकि देश में जिस तरह से बाढ़,बारिश और सूखे का प्रकोप लगातार जारी है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल कि यह जो हो रहा है उसके लिए कौन जिम्मेदार है। पूरी दुनिया को पता है कि कार्बन उत्सर्जन में विकसीत देशो की क्या भमिका है। लेकिन आज इसकी सजा हमें मिल रही है। जलवायु परिवर्तन को लेकर चिंतित विश्व समुदाय पेरिस में इसका कुछ न कुछ हल ढूंढने में लगा था ताकि पृथ्वी को उसके दुष्प्रभावों से बचाया जा सके। जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से भारत भी अछूता नहीं है। कभी बेमौसम बारिश, सूखा, तूफान और कभी बाढ़ से देश को दो चार होना पड़ा है। फिलहाल बारिश से चेन्नई जलमग्न है। जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। सेना के जवानों को मदद के लिए लगाया है।

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अभी तक बाढ और बारिश से दक्षिण भारत में 325 लोगों की मौत हो चुकी है। और लाखो लोग इससे प्रभावित है।मौसम विभाग और सीएसई के आंकड़ों पर गौर करें तो पिछले तीन साल में मौसम के बदलते रुख के चौंकाने वाले मामले सामने आते हैं। अगर हम महीने के आधार पर देखें तो जून 2015 में गुजरात को भीषण बाढ़ का सामना करना पड़ा, तो वहीं अगस्त 2015 में ही असम में आई बाढ़ ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया। ये दोनों राज्य जहां बाढ़ से जूझ रहे थे तो वहीं नवंबर 2015 में उत्तर प्रदेश को सूखे की मार झेलनी पड़ी।2013 से 2015 के बीच अधिकतर राज्यों को बाढ़, सूखा या तूफान के कहर का सामना करना पड़ा है।

कश्मीर में सितंबर 2014 में भीषण बाढ़ ने तबाही मचाई तो जून 2013 में देवभूमि उत्तराखंड में भी बाढ़ का तांडव नजर आया।बिहार में जुलाई 2013 में बाढ़ ने तबाही मचाई तो अगस्त सितंबर में सूखे से। 2013 से आज तक भारत में किसी ना किसी प्रदेश में बाढ़,सूखे और बारिश से लोग प्रभावित ही रहे है। महाराष्ट्रय में सूखे के बाद आज चेन्नई पूरी तरह से बाढ़ और बारिश से तबाह हो चुका है और चेन्नई में हालात इतने खराब हो गये है कि आब तक दक्षिण भारत में बाढ़ और बारिश से 325 लोगो की मौत हो गयी है। और पूरा चेन्नई समुद्र बन चुका है। सरकार ने इस हालात को देखते हुए बचाव और राहत कार्यो के लिए 940 करोड़ देने की घोषणा किया है। इस हालात का जायजा लेने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चेन्नई का दौरा कर रहे है। सरकार की लगातार कोशिश है कि इस बुरे हालात पर जल्द से जल्द काबू पाया जा सके।लेकिन सबसे बड़ा सवाल कि इसके पिछे के जो कारण है जलवायु परिवर्तन पर धरती के लोग कब गंभीर होंगे। अगर आज विश्व के देश जलवायु परिवर्तन पर गंभीर नहीं हुए और कोई ठोस कदम नहीं उठाया तो चेन्नई जैसे और भारत जैसे हालात विश्व को करना पड़ सकता है। और ऐसे देशो के लिए स्थिती और गंभीर है जो समुंद्र के किनारे या बीच में हैं।

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