आधी आबादी का पूरा सच,सलमा बनी देश की पहली महिला गेट वूमेन

| एक्सक्लूसिव

लखनऊ न्यूज 30 ब्यूरो- जहाँ शहरी लड़कियां मूवी, मस्ती और हंसी मजाक के साथ ठहाके लगते हुए सेल्फ़ी खिंचवाती है वहीँ नवाबों के शहर में एक शख्शियत ऐसी भी है जो अपने असाधारण काम से 22 वर्ष की छोटी सी उम्र में सर पर हिजाब पहन कर रेलवे क्रासिंग पर खड़ी होकर दिन भर में 100 से 150 ट्रेनों को लाल-हरी झंडी दिखाती है। साल के 12 महीनो में लगातार 12 घंटे काम करके इस गुमनाम शख्सियत ने आधी आबादी की अनकही कहानियों में अपना नाम देश की पहली महिला गेट वूमेन सलमा बेग के रूप में शुमार करवाया।
उनसे बातचीत करने पर आधी आबादी का पूरा सच सामने आया….

* 20 वर्ष की उम्र में गेट वुमेन की नौकरी करने का विचार मन में कहाँ से आया?
सलमा बेग- वर्ष 2010 में पिता मिर्जा सलीम बेग की ताबियत ख़राब होने लगी और माँ अक्लिमुन्नीशा को पैरालिसिस का अटैक पड़ा तो परिवार में आर्थिक संकट गहरा गया। उस समय मैंने अपने परिवार की दयनीय दशा को देखते हुए एक बेटे का फर्ज अदा किया। रेलवे में अपने पिता को वी आर एस दिला कर पिता की जगह नौकरी करने का आवेदन किया जिसे रेलवे ने स्वीकार कर मुझे गेट वुमेन की नौकरी पर नियुक्त कर लिया।
* आपको अपनी नौकरी में क्या-क्या काम करना पड़ता है?
सलमा बेग- पिछले 2 वर्ष से में नियमित रूप से प्रातः 7.30बजे मल्हौर स्टेशन में रिपोर्ट कर अपनी हाजिरी दर्ज करवाकर 8 बजे तक भरवारा क्रासिंग पर पहुँच जाती हूँ फिर रत 8 बजे तक रेलवे क्रासिंग के पास से गुजरने वाले वाहनों को रोककर प्रतिघंटे 10 ट्रेनों को गुजारते हुए इसकी रिपोर्ट स्टेशन पर करती हूँ।
*आपकी इस नौकरी को लेकर लोगों की क्या प्रतिक्रिया रही?
सलमा बेग- 20 वर्ष की उम्र में एक लड़की होने के नाते और एक विशेष धर्म संप्रदाय से ताल्लुक रखने के साथ ही पुरुष प्रधान समाज , विभाग और रिश्तेदारों की आलोचनाओं का  दंश झेलना पड़ा। लेकिन माँ-पिता के प्रोत्साहन से में आगे बढ़ी और अपनी मेहनत और लगन  से अपने आलोचकों का मुंह बंद किया।
* नौकरी के कारण आपकी पढाई पर क्या प्रभाव पड़ा?
सलमा बेग- मेरी नौकरी 1/1/2013को लगी और उसी वर्ष मैंने अपनी स्नातक तक की पढ़ाई पूरी कर ली थी लेकिन नौकरी की व्यस्ततम समय की वजह से मैं आगे की पढाई जारी न रख सकी।
* आपको अपनी नौकरी में किन किन समस्याओं का सामना करना पड़ता है?
सलमा बेग- रेलवे क्रासिंग पर बिजली, पानी व शौचालय की सबसे बड़ी समस्या है और इन समस्याओं के बीच पुरे दीन 12 घंटे लगातार काम करने के कारन अकसर तबियत ख़राब हो जाती है। रमजान के दिनों में भी 12 घंटे की ड्यूटी  पुरे शरीर को तोड़ कर रख देती है। इन समस्याओं से निजात पाने के लिए हमने प्रशासन को कई बार पत्र लिखा लेकिन अभी तक कोई सुनवाई नही हुई।
* आप रेलवे प्रशासन से क्या सुविधाएं चाहती है?
सलमा बेग- यदि प्रशासन बिजली,पानी और शौचालय की सुविधा मुहैया करा दे और मेरी 12 घंटे की ड्यूटी को 8 घंटे में तब्दील कर दे तो मुझे आगे की पढाई करने का मौका और पर्याप्त समय मिल जाएगा।
* आपका सपना क्या है और आप अपनी जैसी लड़कियों को क्या संदेश देना चाहती है?
सलमा बेग- मैं अपनी छोटी बहन को अच्छी शिक्षा देकर उसकी शादी करवाना चाहती हूँ और मैं आगे और पढना चाहती हूँ। मैं अपने जैसी लड़कियों को यह सन्देश देना चाहती हूँ कि कोई भी काम छोटा या बड़ा नही होता अगर दृढ इच्छाशक्ति और जज्बा हो तो हम हर वो काम कर सकते है जिसे हमेशा से ही तथाकथित पुरुष प्रधान समाज में करने में मनाही थी।।

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