सदी की बड़ी खोज – वैज्ञानिकों ने ढूंढ़ी गुरुत्वाकर्षण लहरें

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एक शताब्दी पहले आइंस्टीन ने अंतरिक्ष में जिन गुरुत्वाकर्षण लहरों की भविष्यवाणी की थी उसे वैज्ञानिकों ने अंतत: ढूंढ निकाला है। वैज्ञानिकों ने बुधवार को इसकी घोषणा की और इस सफलता की खुशी की तुलना गैलिलियो द्वारा टेलीस्कोप से पहली बार ग्रहों के देखे जाने से की। वैज्ञानिकों ने इसे खगोलशास्त्र की महत्वपूर्ण खोज बताया है।

ब्रह्मांड में होने वाले जबरदस्त टकरावों से उत्पन्न होने वाले इन तरंगों की खोज से खगोलविद काफी खुश हैं क्योंकि इससे ब्रह्मांड को देखने का एक नया नजरिया मिल गया है। उनके लिए यह एक मूक फिल्म को आवाज देने जैसा है क्योंकि ये तरंगे ब्रह्मांड की आवाज हैं। खोज टीम में शामिल कोलंबिया यूनिवर्सिटी के एस्ट्रोफिजिसिस्ट स्जाबोल्क्स मार्का ने कहा, ‘अभी तक हमारी सिर्फ नजरें आसमान पर थीं और हम उसका संगीत नहीं सुन सकते थे। अब आकाश पहले जैसा नहीं होगा।’

शोधकर्ताओं ने घोषणा की कि 1.3 अरब वर्ष पहले जब दो ब्लैक होल टकराए थे तो इन दोनों के जुड़ने से एक तरंग अंतरिक्ष के रास्ते 14 सितंबर 2015 को पृथ्वी पर पहुंचा। जटिल यंत्रों के जरिए इसकी खोज की गई। इस घटना की पहचान अमेरिका स्थित दो भूमिगत डिटेक्टरों ने की। इन डिटेक्टरों को कुछ इस तरह डिजाइन किया गया है जो गुरुत्व तरंगों से गुजरने वाली अत्यंत छोटी कंपन का भी पता लगा सकते हैं।

इस परियोजना को लेसर इंटरफेरोमीटर ग्रैविटेशनल ग्रैविटेशनल-वेव ऑब्जर्वेटरी या लिगो के नाम से जाना जाता है जिसकी लागत 1.1 अरब डॉलर है। इस परियोजना की फंडिंग करने वाले अमेरिकी नेशनल साइंस फाउंडेशन के निदेशक फ्रांस कोरडोवा ने कहा, ‘लिगो ने एस्ट्रोफिजिक्स के क्षेत्र में पूरी तरह एक नये क्षेत्र की शुरुआत की है।’

वैज्ञानिकों को गुरुत्व तरंगों की पहली झलक दिखलाने वाली मशीन लिगो (लेजर इंटरफोरोमीटर ग्रेविटेशनल वेव ऑब्जर्वेटरी) अब तक की सबसे एडवांस डिटेक्टर है। अमेरिका में इस तरह के दो भूमिगत डिटेक्टर स्थापित किए गए हैं। इनमें से एक वाशिंगटन के हैनफोर्ड, जबकि दूसरा यहां से तीन हजार किलोमीटर दूर लुसियाना में है।

इनका निर्माण 1999 में शुरू हुआ था और 2001 से 2007 तक निरीक्षण किए गए। इसके बाद वैज्ञानिकों ने लिगो में बड़ा बदलाव करते हुए इसे पहले से 10 गुना अधिक शक्तिशाली बनाया। इस एडवांस मशीन ने पहली बार पिछले साल सितंबर में पूरी तरह काम किया। अपनी खोज की कड़ी में लुसियाना स्थित डिटेक्टर ने 14 सितंबर को गुरुत्व तरंगों के पहले संकेत पकड़े

वाशिंगटन में स्थित मशीन ने इन्हीं तरंगों को 7.1 मिलीसेकेंड बाद नोट किया। इससे वैज्ञानिकों को अपनी खोज के हकीकत होने का विश्वास हुआ। लिगो अंग्रेजी के अक्षर एल आकार की मशीन है, जो लेजर लाइट तथा अंतरिक्ष की भौतिकी का इस्तेमाल कर गुरुत्व तरंगों का पता लगाती है।

टेलीस्कोप से अलग यह मशीन प्रकाश पर निर्भर नहीं है। यह अंतरिक्ष में तरंगों को महसूस करती है। लिगो डिटेक्टर में दो बड़ी बांह जैसी संरचना होती है, जिसमें ऑप्टिकल इंस्ट्रूमेंट लगे होते हैं।

गुरुत्व तरंगे अंतरिक्ष में होने वाले खिंचाव के माप हैं। ये बड़े द्रव्यमानों की गति के ऐसे प्रभाव हैं जो अंतरिक्ष समय की संरचना को स्पष्ट करते हैं जो अंतरिक्ष और समय को एक रूप में देखने का तरीका है। ये प्रकाश की गति से चलती हैं और इन्हें रोकना या बाधित करना संभव नहीं है।

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