भोपाल गैंगरेप केस- वारदात के 52 दिन में आया फैसला, सभी दोषियों को मिली ये सजा

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भोपाल के बहुचर्चित गैंगरेप मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट ने गैंगरेप करने वाले चारों दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है । 31 अक्टूबर को हबीबगंज रेलवे स्टेशन के पास UPSC एग्जाम की तैयारी करने वाली नाबालिग लड़की से गैंगरेप करने के मामले में ये सजा सुनाई गई है । गैंगरेप को कोर्ट ने रेयरेस्ट ऑफ रेयर क्राइम माना । फास्ट ट्रैक कोर्ट ने एक महीने के करीब चली सुनवाई के बाद आरोपियों को उम्रकेद की सजा सुनाई ।

भोपाल की एडिशनल डिस्ट्रिक्ट कोर्ट जज की अदालत में 21 नवंबर से इस मामले में रोज सुनवाई चल रही थी । फैसला आने के बाद कोर्ट के फैसले पर विक्टिम के पैरेंट्स ने कहा, “वे दोषियों के लिए फांसी चाहते थे, लेकिन इस फैसले से भी संतुष्ट हैं। कम से कम दोषी जिंदा रहने तक जेल में तो रहेंगी। इससे वे फिर ऐसा गुनाह कभी नहीं कर पाएंगे।




मामले की जांच करने वाली एसपी रेल रुचिवर्धन मिश्रा ने कहा, “इस तरह के मामलों में जल्दी सुनवाई होने से आरोपियों के हौसले पस्त होंगे। पूरा पुलिस विभाग और ज्यूडिशियरी विक्टिम के परिवार के साथ है। वहीं सरकारी वकील रीना वर्मा ने कहा, “इस तरह के फैसले से कानून पर लोगों का भरोसा और बढ़ेगा। इसके तहत चारों दोषी नेचरल डेथ तक जेल में ही रहेंगे।

गौरतलब है कि मध्य प्रदेश के ही विदिशा की रहने वाली और भोपाल में यूपीएससी की कोचिंग कर रही 19 वर्षीया छात्रा के साथ हबीबगंज रेलवे स्टेशन के पास 4 लोगों ने गैंगरेप किया था । इस गैंगरेप की घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया था । पीड़िता के मुताबिक, आरोपी गैंगरेप के बीच पीड़िता को बेहोश छोड़ पान-गुटखा खाने गए और लौटकर फिर से गैंगरेप किया ।

किसी तरह से आरोपियों के चंगुल से बची पीड़िता ने अपने पिता के साथ 3 थानों के चक्कर लगाए, लेकिन कहीं सुनवाई नहीं हुई, जबकि पीड़िता के पिता खुद पुलिसकर्मी हैं और मां सीआईडी में हैं । इसके बाद पीड़िता के पिता खुद पीड़िता को साथ ले घटनास्थल पर गए और दो आरोपियों को पकड़ भी लिया ।



इस केस दर्ज करने से आनाकानी करने और पीड़िता की शिकायत को फिल्मी कहानी बताने वाले 7 पुलिसकर्मियों को बाद में सस्पेंड भी किया गया था और आईजी और एसपी का भी ट्रांसफर कर दिया गया था । मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने मामले में राज्य सरकार को फटकार भी लगाई थी और पूरे घटनाक्रम को ट्रैजडी ऑफ एरर्स करार दिया था । इतना ही नहीं मेडिकल रिपोर्ट तैयार करने में भी काफी लापरवाही बरती गई थी। इस मामले में संबंधित डॉक्टर को भी सस्पेंड कर दिया गया था।

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