सभी बड़ी वारदातें यूपी पुलिस के लिए बनती जा रहीं हैं पहेली

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Human Silhouette with Knife in shadow on wooden background, XXXL

लखनऊ न्यूज 30 ब्यूरो– जरायम की दुनिया में कुख्यात माफियों की तरह वारदात करने वाले खूंखार शूटर राजधानी में पनपने लगे हैं। भले ही यह बदमाश गैर जनपदों के हो लेकिन राजधानी में उनकी पैठ मजबूत होने लगी है। राजधानी के शहरी और ग्रामीण इलाकों में दिनदहाड़े हो रही सनसनीखेज घटनाएं इसका प्रमाण हैं। बैंक, कैशवैन और एटीएम लूट जैसी सनसनीखेज वारदातों के बाद भी पुलिस इन तक नहीं पहुंच पा रही है। कुख्यात अपराधियों की गिरफ्तारी नहीं होने पर पुलिस अधिकारियों में बेचानी बनी हुई है। इसके साथ ही राजधानी में बदमाशों को सह देने वाले लोगों तक पुलिस पहुंचने में भी नाकाम है।

राजधानी में बढ़ते अपराध पर लगाम लगाने को लेकर पुलिस अधिकारी कई योजनाएं बना रहे हैं। पर बदमाशों की सक्रियता उनकी योजना को ध्वस्थ कर दे रही है। राजधानी के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में गार्ड की हत्या कर बैंक लूटने जैसी सनसनीखेज वारदात इसका प्रमाण है। हत्याकाण्ड के चार दिन बाद भी पुलिस स्केच और 20 हजार इनाम की घोषणा कर उन्हें पकड़ने के लिए प्रयास कर रही है। पर पुलिस को बदमाशों के बारे मंे कोई महत्वपूर्ण सुराग नहीं मिला है। वहीं हसनगंज के बाबूगंज में नौ माह पूर्व 27 फरवरी को तीन लोगों की हत्याकर 55 लाख लूटने के मामले में भी पुलिस को कोई ठोस सुराग नहीं मिले हैं। हलांकि उस दौरान रहे एसएसपी ने इस लूटकाण्ड को तेलांगाना में मारे गए सिमी के आंतकियों से जोड़ दिया था। पर बाद में पुलिस के अधिकारियों ने इससे इंकार कर दिया था। इसी तरह कुख्यात अपराधियों ने सरोजनीनगर के मानसरोवर कॉलोनी के पास 22 जून को दिनदहाड़े चेकमेट सिक्योरिटी एजेंसी लिमिटेड की कैशवैन के कर्मचारियों पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी थी, जिसमें एजेंसी के कस्टोडियन की मौत हो गई थी, जबकि दो लोग घायल हुए थे। बदमाश गोली मारने के बाद कैशवैन से 17 लाख रुपये लूट लिए थे। मामले के पांच महीने बाद भी पुलिस को बदमाशों के बारे में कोई सुराग नहीं मिला। ठीक इसी तर्ज पर बदमाशों ने चिनहट में एसबीआई बैंक के गार्ड की गोली मारकर हत्या कर दी और दिनदाहड़े बैंक लूट ले गए।
ऐसा लग रहा है कि पुलिस का मुखबिर तंत्र  कमजोर होता जा रहा है।कुछ वर्षों पूर्व पुलिस गुडवर्क में मुखबिर तंत्र की अहम भूमिका रहती थी। पर सर्विलांस के आते ही पुलिस और मुखबिर तंत्र का गठजोड़ खत्म होने लगा, जिसका कारण सनसनीखेज वारदातें बढ़ती गईं। शातिर अपराधी इलेक्ट्रिानिक चीजों का प्रयोग नहीं करते हैं, जिसके कारण सर्विलांस भी फेल हो जा रही है। वहीं पुलिस से दूर होता मुखबिर तंत्र अब सूचनाएं देने से कतराता है।सूत्रों की माने तो जगह-जगह अवैध रूप से बनी राजधानी में झोपड़ पट्टियांे में अपराधी शरण ले रहे हैं। पिछले दिनों महानगर और मडियांव पुलिस ने झोपड़पट्टियों से ही शातिर अपराधियों को गिरफ्तार कर खुलासे किये थे। सवाल यह है कि कहीं चिनहट में हुई बैंक लूट करने वाले लुटेरे इन झोपड़पट्टियों में ही तो नहीं छिपे बैठे हैं। वहीं पुलिस उन्हें इधर-उधर ढूंढ रही है। ये ही कारण है कि लगातार लखनऊ में बड़ी वारदातें हो रही है। और पुलिस इस पर रोक नही लगा पा रही है और इसके साथ ही साथ वारदातों के बाद पुलिस अपराधियों तक पहुंचनें में भी नाकाम रह रही है। इस कारण लागतार सवाल उठ रहे है।

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