रामसेतु- कल्पना नहीं ‘हकीकत’ है रामसेतु, भू वैज्ञानिकों ने किया ये बड़ा खुलासा

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करोड़ों हिंदुओं की आस्था के प्रतीक राम सेतु के अस्तित्व को लेकर अक्सर बहस होती रहती है इस पर कई रिसर्च भी हो चूकी है और अब हाल ही में एक साइंस चैनल ने राम सेतु को लेकर एक बड़ा खुलासा किया है। साइंस चैनल का दावा है कि राम सेतु मानव निर्मित है यानी कि इसका निर्माण इंसानों ने किया है। रामसेतु और उसके आसपास मिले पत्थरों की जांच में वैज्ञानिकों ने यह पाया कि रामसेतु के पत्थर करीब 7 हजार साल पुराने हैं ।

अबतक ये माना जाता था कि रामसेतु प्राकृतिक है लेकिन तमाम कयासों पर इस साइंस चैनल ने विराम लगा दिया है। इतना ही नहीं वैज्ञानिकों ने जो समय रामसेतु के निर्माण का बताया है वो समय हिंदू मायथोलॉजी से भगवान राम का बताया जाता है। अमेरिकन भू-वैज्ञानिकों के हवाले से एनसिएंट लैंड ब्रिज नाम के एक प्रोमो में ऐसा दावा किया गया है कि भारत में रामेश्वरम के नजदीक पामबन द्वीप से श्रीलंका के मन्नार द्वीप तक लंबी बनी पत्थरों की यह श्रृंखला मानव निर्मित है।

अमेरिका के साइंस चैनल ने अपने सांइस आधारित प्रोग्राम ‘व्हाट ऑन अर्थ’ ने रामसेतु के होने का दावा किया है। कुछ आर्कियोलॉजिस्ट और भूगर्भ वैज्ञानिकों ने सेटलाइट के जरिए मिली रामसेतु की तस्वीरों, वहां की मिटटी और बाकी चीजों की स्टडी की और पाया की रामसेतु असल में था। वैज्ञानिकों को अपने रिसर्च में इस बात के प्रमाण मिले हैं कि रामसेतु आज से हजारों साल पुराना है और इसमें लगा पत्थर सात हजार साल पुराने हैं ।

भू-वैज्ञानिकों ने नासा की तरफ से ली गई तस्वीर को प्राकृतिक बताया है ।वैज्ञानिकों ने अपनी रिसर्च में पाया कि 30 मील लंबी राम सेतु मानव निर्मित है । भू-वैज्ञानिकों का ये भी दावा है कि जिस सैंड पर यह पत्थर रखा हुआ है ये कहीं दूर जगह से यहां पर लाया गया है । वैज्ञानिकों के मुताबिक सैंड के निचले हिस्से का पत्थर 7 हजार साल पुराना है जबकि सैंड के ऊपरी हिस्से का पत्थर महज 4 हजार साल पुराना है ।अमेरिकी भूविज्ञानिकों का दावा है कि रामसेतु पर पाए जाने वाले पत्थर बिल्कुल अलग और बेहद प्राचीन हैं । रामसेतु का ढांचा प्राकृतिक नहीं है, बल्कि इंसानों ने बनाया है।




बता दे कि रामसेतु के अस्तित्व को लेकर अक्सर बहस होती रहती है। हिंदूवादी संगठन जहां दावा करते हैं कि ये वही रामसेतु है जिसका जिक्र रामायण और रामचरितमानस में है तो वहीं एक पक्ष ऐसा भी है जो इसे केवल एक मिथ या कल्पना करार देता है । स्कंद पुराण, विष्णु पुराण, अग्नि पुराण और ब्रह्म पुराण में राम सेतु का उल्लेख मिलता है। रामेश्वरम में आज भी ऐसे कुछ पत्थर मौजूद हैं, जो पानी में नहीं डूबते हैं, बता दें कि रामायण में पानी में ना डूबने वाले पत्थरों का भी जिक्र है ।भारत के रामेश्वरम और श्रीलंका के बीच करीब 48 किलोमीटर लंबी चट्टानों की इस चेन को भारत में ‘रामसेतु’ और दुनियाभर में ‘एडम्स ब्रिज’ के नाम से जाना जाता है

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