क्या आम आदमी पार्टी सोशल मीडिया से कर रही नीतीश के लिए प्रचार?

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आम आदमी पार्टी के मुखिया और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ अपनी दोस्ती निभाना तो चाहते हैं लेकिन महागठबंधन जिसमें कांग्रेस भी शामिल है वो उनकी मजबूरी बन रही है। यही कारण है कि कभी खुद तो कभी आम आदमी पार्टी के दूसरे नेताओं से सोशल मीडिया पर नीतीश के पक्ष में अप्रत्यक्ष प्रचार करवा रहे हैं।

केजरीवाल ने अब नीतीश के पक्ष में प्रचार करने के लिए सोशल मीडिया का सहारा लिया है। ताजा उदाहरण आप के नेता आशुतोष लेकर सामने आ रहे हैं। पिछले कुछ दिनों से वह बिहार चुनाव पर लिख रहे हैं। उसमें वह बिहार में भाजपा की रणनीति पर प्रहार और नीतीश को पसंदीदा मुख्यमंत्री साबित करने की कोशिश करने नजर आ रहे हैं। आशुतोष ने आज ट्वीट कर भाजपा से सवाल पूछा, क्या यह सच नहीं कि संघ ओबीसी को आरक्षण देने संबंधी मंडल कमीशन के प्रस्ताव के खिलाफ थी या है? ज्ञात हो कि इससे पहले केजरीवाल ने भी 16 अक्टूबर वाले दूसरे चरण के मतदान के दिन ट्वीट कर कहा था, बिहार चुनाव में मोदी बुरी तरह हार रहे हैं और नीतीश जीत रहे हैं।

हाल ही में आप नेता आशुतोष ने yourstory.com के लिए बिहार चुनाव पर लिखा। उन्होंने लिखा, भाजपा को बिहार में भी दिल्ली विधानसभा चुनाव के नतीजे बुरी तरह सता रहे हैं। दिल्ली के बाद मोदी और भाजपा के लिये यह एक और पूर्ण पराजय का कारण बन रही है बिहार चुनाव जो प्रधानमंत्री की मूल कमजोरी साबित हुई।

आशुतोष लिखते हैं, दिल्ली चुनावों के दौरान मोदी की प्रचार की शैली, उनकी भाषा, अरविंद केजरीवाल के खिलाफ उनका विषवमन और गौण मुद्दों पर अपना ध्यान केंद्रित करने की उनकी रणनीति ने उन्हें दिल्ली की जनता के सामने उजागर कर दिया। मोदी अपनी खासियत को भी खोते गए। बिहार चुनावों के बारे में सबसे अच्छी बात यह है कि दिल्ली की तरह वहां भी लोगों में नीतीश कुमार के प्रति अपार विश्वास दिखाई दे रहा है। भाजपा द्वारा बेहद मजबूत मीडिया कैंपेन और बड़े पैमाने पर किये जा रहे प्रचार के बावजूद रिपोर्ट बताती हैं कि मुख्यमंत्री के रूप में वे लोगों की पहली पसंद हैं और मोदी से वैसे ही अधिक लोकप्रिय हैं जैसे दिल्ली में अरविंद उनसे कहीं आगे थे।

आशुतोष के मुताबिक यह भारतीय राजनीति में एक बहुत महत्वपूर्ण विकास है। नीतीश की लोकप्रियता और स्वीकार्यता सभी जातियों और वर्गों में है। यह उनके लिये वास्तव में एक बहुत बड़ी उपलब्धि है क्योंकि ऐसा बिहार में हो रहा है जहां राजनीति जाति से और केवल जाति से ही परिभाषित की जाती है। ऐसे में नीतीश विकास की बातें कर रहे हैं। इसमें कोई शक नहीं है कि लालू प्रसाद यादव के साथ उनका गठबंधन उनके पक्ष में साबित हो रहा है क्योंकि इसके चलते एक निश्चित वर्ग का वोट उनके खाते में आएगा। लेकिन वे 10 प्रतिशत अस्थिर मतदाता मजबूती से उनके पीछे खड़े दिखाई दे रहे हैं, जिनका निर्णय संतुलन को नीतीश के पक्ष में बदलने में कारगर साबित होगा।

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