लखनऊ में जमघट मतलब जनता दरबार नहीं,पतंगबाजी का त्योहार

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लखनऊ न्जूज 30 व्यरो- पूरे देश में शरद पूर्णिमा और सरस्वती पूजन के दिन पतंग उड़ाया जाता है वहीं लखनऊ में दिवाली के अगले दिन  पतंग उड़ाने का आयोजन होता है।और लखनऊ को लोग उसे जमघट के नाम से मनाते है।इसमें लखनऊ की तीन बड़ी संस्थाएं पतंगबाजी का आयोजन कराती है जिनमे लखनऊ काइट कांटेस्ट ऑर्गेनाइजेशन प्रमुखता से भागीदारी। 1985 से लगातार चल रहीे इस संस्था में लखनऊ के करीब 64 क्लब आते है। इस संस्था के सचिव सैयद रिजवी ने बताया की इस नवम्बर महीने में हमेशा की तरह इस बार भी लखनऊ गोमती नगर में फन मॉल के पीछे पतंग प्रतियोगिता का आयोजन किया जायेगा। लखनऊ में पतंग उड़ाने का आयोजन नवाबों के समय से लगातार पुरे हर्षोउल्लास से  किया जा रहा है। संस्थाओं के प्रयासों की बदौलत इसे आज भी जिन्दा रखा गया है। हालाँकि मेडिकल कालेज के पास बुद्धा पार्क के पीछे एक पतंग पार्क भी बनाया गया जहाँ काफी अरसे तक पतंग प्रतियोगिताओ का आयोजन किया जाता था लेकिन भाग दौड़ की जिंदगी और समय की कमी ने वहां पर पतंग के आयोजनों में कमी ला दी है। लेकिन पतंगबाजों के जूनून की हद ये है कि शहर में कहीं न कहीं पतंगबजी का आयोजन करते रहते है। यूपी की राजधानी लखनऊ जो हमेशा सियासत और सत्ता के दायरे में जनता दरबार लगाती है साल में एक बार ऐसा भी आता है जहां सिर्फ खुशियों का जमघट लगता है । और उन्हीं खुशियों को रंगीन पतंगों के सहारे लखनऊवासी आसमान की ऊचाईयों तक पहुचातें है। इसे ही लखनऊ में जमघट कहते है।

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