देश में संस्कृत के लिए बुरे दिन ,देशभर में एक मात्र संस्कृत का परीक्षार्थी

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sanskrit
यह सुनकर आश्चर्य होता है कि जिस भाषा संस्कृत को विश्व की सबसे प्राचीन भाषा का गौरव प्राप्त है उस भाषा के  मायने छात्रों के भीतर नगण्य होते जा रहे हैं क्योंकि स्कूलों में सस्कृत पढ़ने वाले छात्रों की संख्या न के बराबर होती जा रही है जिसके फलस्वरूप, काउंसिल फार द इंडियन स्कूल सर्टिफ़िकेट एग्जामिनेशन (आइसीएसई) की परीक्षा में शामिल होने जा रहे 72002 छात्रों में से मात्र एक ही छात्र संस्कृत की परीक्षा देगा। हालांकि इससे यह पता चलता है कि भारतवर्ष में सस्ंकृत की दशा ठीक दिखाई देती हुई नजर नही आ रही है जबकि देशभर मे सबसे अधिक 15 विश्वविद्यालय सस्ंकृत भाषा से ही जुड़े हुए हैं फिर भी छात्रों में सस्ंकृत के प्रति रुचि न के बराबर ही होती जा रही है और यह देश मे सस्ंकृत भाषा के लिए एक दुखद विषय बन गया है। और सरकार और देश दोनों के लिए यह चिंता का विषय है कि कैसे इस विषय  में लोगों की रुचि बढ़ायी जाय़।

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