हिंदी सम्मेलन के लिए अमिताभ को न्योते पर सवाल- क्या सेलिब्रिटी हैं, इसलिए आएंगे?

| कार्यक्रम
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नई दिल्ली. बॉलीवुड सुपरस्टार अमिताभ बच्चन को भोपाल में चल रहे विश्व हिंदी सम्मेलन के आखिरी दिन यानी 12 सितंबर को बतौर मेहमान बुलाया गया है। वे इस बारे में विचार रखेंगे कि अच्छी हिंदी कैसे बोली जाए? हालांकि, सम्मेलन में एक एक्टर को बुलाने और पद्म पुरस्कार से सम्मानित साहित्यकारों को नहीं बुलाने पर विवाद खड़ा हो गया है।
किसने उठाया सवाल?
पद्मश्री साहित्यकार गिरीराज किशोर ने अमिताभ को हिंदी सम्मेलन में बुलाए जाने का खुलकर विरोध किया है। उन्होंने कहा कि इस सम्मेलन में देश के कई बड़े साहित्यकारों और कवियों की उपेक्षा की गई है। भोपाल में ही दो-दो पद्म पुरस्कार सम्मानित साहित्यकार मौजूद हैं, जिन्हें न्योता नहीं मिला। दूसरी बात यह कि अमिताभ बच्चन को किस हैसियत से हिंदी सम्मेलन में बुलाया गया? क्या वे एक सेलिब्रिटी हैं इसलिए? हां, उनके पिता हरिवंश राय बच्चन जरूर एक महान लेखक थे। लेकिन किसी के पिता कवि या लेखक हों तो क्या ये हिंदी सम्मेलन में बुलाए जाने का आधार बन सकता है? सरकार भी सम्मेलन को ग्लैमरस बनाने की पूरी कोशिश कर रही है।
किसलिए आएंगे अमिताभ?
शुक्रवार को विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कहा कि अमिताभ बच्चन को अच्छी हिंदी कैसे बोली जाए, यह बताने के लिए विश्व हिंदी सम्मेलन में बुलाया गया है।
भोपाल में हिंदी के बहाने ‘विवादों’ का सम्मेलन
भोपाल में हिंदी सम्मेलन के आयोजन से पहले तैयारियों का जायजा लेने आए केंद्रीय विदेश राज्यमंत्री वीके सिंह के बयान से बड़ा विवाद खड़ा हो गया था। वीके सिंह ने कहा था- ”यहां लेखक, कवि और साहित्यकार आएंगे। घूमेंगे, बैठेंगे और दारू पिएंगे।” बयान मीडिया में आने के बाद इसकी कड़ी आलोचना हुई। इसी बीच भोपाल के स्थानीय पद्म पुरस्कार विजेता साहित्यकारों को इन्विटेशन नहीं देने का मुद्दा भी उठा। हिंदी के साहित्यकारों ने इसका खुलकर विरोध किया। हिंदी सम्मेलन में साहित्यकारों के दारू पीने से जुड़े वीके सिंह के बयान पर देश के जानेमाने कवि नीरज ने भी नाराजगी जाहिर की।
कांग्रेस ने भी उठाया इन्विटेशन पर सवाल
सम्मेलन के पहले दिन कांग्रेस नेता राजीव शुक्ला ने भी आयोजन में हिंदी से जुड़े लोगों को नहीं बुलाने पर सवाल उठाया था। उन्होंने कहा कि सरकार को सभी विचारधाराओं के साहित्यकारों, कवियों और लेखकों को बुलाना चाहिए था। उनका इशारा सिर्फ आरएसएस विचारधारा से जुड़े कवियों को बुलाने की तरफ था।

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