अपना हथियार बचाने के चक्कर में जान गंवाते हैं यूपी के पुलिसवाले

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Muzaffarnagarr_PTI

लखनऊ न्यूज 30 ब्यूरो– मुख्यमंत्री जहां उत्तर प्रदेश को उत्तम प्रदेश बनाने का सपना देख रहे हैं वहीं इस समय यूपी की कानून व्यवस्था लड़खड़ायी हुयी है पिछले दिनों से यूपी में बदमाशों और असमाजिक तत्वों का बोलबाला है गाजियाबाद में चौकी में घुसकर सिपाही को गोली मारकर हत्या कर दी गयी वहीं राजधानी लखनऊ में हाईकोर्ट के जज के गनर को गोली मारकर सर्विस पिस्टल लूट ली गयी. इसके पहले प्रतापगढ़ जिले में इन्स्पेक्टर अनिल कुमार सिंह की हत्या की जा चुकी है यूपी में वर्दीधारी ही सुरक्षित नहीं है? हलाकि राजधानी में अगर एसएसपी नौसिखिये थाना प्रभारियों पर कार्यवाई करना भी चाहें लेकिन सफ़ेद पोश नेताओं के फरमान के आगे नहीं कर पा रहे है. सुरक्षा का क्या आलम होगा इसका अंदाजा आप खुद लगा सकते हैं ध्वस्त कानून व्यवस्था पर एडीजे लॉ एण्ड ऑर्डर दलजीत चौधरी ने गाज़ियाबाद की घटना के बारे में बताया घटना का अनावरण हो गया है लखनऊ की घटनाओं का जल्द खुलासा होगा टीमे काम कर रहीं हैं, सम्बंधित अधिकारीयों को जवाबदेही तय होगी।राजधानी में बेखौफ लुटेरे असलहे हासिल करने के लिए वर्दीधारियों को भी निशाना बनाने से नहीं चूक रहे हैं। गोमतीनगर में बुधवार देर शाम जज की सुरक्षा में लगे कांस्टेबल प्रमोद कुमार की पिस्टल छीनने के लिए उन्हें गोली मारे-जाने की घटना से एक बार फिर यही सच उभरकर सामने आया है। उधर पुलिस ने बदमाशों को दबोचने के लिए जाल बिछा दिया है। दूसरों की सुरक्षा का जि मा संभालने वाले पुलिसकर्मी खुद असुरक्षित हैं। असलहे हासिल करने के लिए अपराधी उन्हें निशाना बनाने से नहीं चूकते। अपराधियों के हौशले इतने बुलंद है कि वे सरेशाम और सरेराह पुलिसकर्मियों पर हमला कर रहे हैं।
गोमतीनगर स्थित छोटी जुगौली क्रासिंग के पास हाई कोर्ट के जज की सुरक्षा इंदिरानगर निवासी कांस्टेबल प्रमोद कुमार को बुधवार देर शाम भीड़भाड़ में को बदमाशों द्वारा गोली मारे जाने की वारदात के बाद पुलिस सुरक्षा में लगे पुलिसकर्मी सकते में हैं। सूत्र बताते हैं कि अफसरों ने बुधवार देर रात आनन-फानन में क्राइम मीटिंग की और कांस्टेबल पर हुए जानलेवा हमले को लेकर अफसोस जाहिर की। सुरक्षा में लगे पुलिसकर्मियों पर हो रहे हमला पर अधिकारियों ने चर्चा कर अपराधियों को जल्द से जल्द पकडऩे के निर्देश दिये। एसएसपी राजेश कुमार ने बदमाशों की धरपकड़ के लिए कई थानों की पुलिस और क्राइम ब्रांच टीम को लगाया है।
केस नंबर एक: 15 जून 2012 को  उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में इलाहाबाद-हरिद्वार एक्सप्रेस में15-20 अज्ञात लोगों ने सिपाही राम निरंजन सिंह को सरेआमसीने में 315 बोर की गोली मारकर मौत की नींद सुला दिया। सिपाही प्रतापगढ़ जिले के थाना फतनपुर के गांव करका सुअंसा में रहता था।
केस नंबर दो: 3 मार्च 2013 कोउत्तर प्रदेश में कुंडा क्षेत्र में दो गुटों के बीच हुई गोलीबारी की घटना में गांव के प्रधान सहित दो लोगों की मौत हो गई। इस घटना को नियंत्रित करने गए कुंडा सीओ जियाउल हक भी शहीद हो गए।
केस नंबर तीन: 3 मार्च 2013 कोयूपी के बरेली जिले में बदमाशों ने पुलिस टीम पर उस दौरान हमला किया जब टीम बरेली के बभिया गांव में हिस्ट्रीशीटर जगपाल को पकड़ने गई थी। जगपाल को गिरफ्तार करके पुलिस ला रही थी तभी 15-20 लोगों ने पुलिस टीम पर हमला कर दिया जिसमें सिपाही प्रदीप कुमार की गोली लगने से मौत हो गयी।
केस नंबर चार: 16 जून 2014 कोउत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले के रामगढ़ थानाक्षेत्र में सिपाही प्रताप सिंह और गिरिराज किशोर गुर्जर को बदमाशों ने गोलियों से भून डाला था। मालूम हो कि इस वारदात के दौरान इलाके में कुछ बदमाशों ने लूटपाट की थी और पीड़ित व्यक्ति सिपाहियों के पास शिकायत लेकर आया था जिसपर सिपाहियों ने बदमाशों से लोहा लिया था तभी सिपाही बदमाशों की गोली का शिकार हो गए।
केस नंबर पांच: 20 नवंबर 2015को यूपी के प्रतापगढ़ जिले में बदमाशों ने इंस्पेक्टर अनिल सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी। उन्होंने अपनी जान का खतरा होने की आशंका भी जताई थी। लेकिन उन्हें साजिश के तहत निलंबित किया गया था। इस मामले में पुलिस अधिकारी इंस्पेक्टर की मौत को हादसा बता रहे थे उनके परिवार वालों ने सीबीआई जांच की मांग की है।

 केस नंबर छह: 25 नवम्बर 2015को उत्तर प्रदेश में लॉ एंड आर्डर की दशा ऐसी है कि पुलिस वाले ही नहीं सुरक्षित हैं। गाजियाबाद जिले में बंथला चौकी में पानी लेने के लिए घुसे नशे में धुत बदमाशों ने मैनपुरी जिले में रहने वालेसिपाही सुदेश को गोलियों से भून कर मौत के घाट उतार दिया।तीनों बदमाश पास में ही हो रही एक शादी समारोह में आये थे वहां से शराब पीने के लिए चौकी में पानी मांगने गए थे लेकिन सिपाही ने मना कर दिया था।
केस नंबर सात: 25 नवम्बर 2015 को यूपी की राजधानी लखनऊ के गोमतीनगर इलाके में बेखौफ बदमाशों ने खुली चुनौती देते हुए सरेराह सिपाही प्रमोद कुमार को गोली मारकर उसकी सरकारी पिस्टल लूट ली। सिपाही हाईकोर्ट के जज की सुरक्षा में तैनात था और ड्यूटी समाप्त होने के बाद घर वापस जा रहा था। बाइक सवार बदमाश वारदात को अंजाम देने के बाद हवा में फायरिंग करते हुए फरार हो गये।
पुलिसकर्मियों की हत्या और उनके ऊपर हुए हमले
वर्ष 2008- भूतनाथ मारकेट के पास आरक्षी राजेन्द्र सिंह की गोली मारकर हत्या।
वर्ष 2003- दरोगा अनुप स्वामी को बाइक सवार बदमाशों ने मार डाला।

वर्ष 2002-लविवि रोड पर गनर मुुशीलाल की हत्याकर कार्बाइन लूटी।

 वर्ष 1999- सिकन्दरबाग चौराहे के पास गनर दर्शनलाल की हत्याकर कार्बाइन लूटी।

 वर्ष 1998- निशातगंज स्थित बंधा रोड पर गनर जगन्नाथ पटेल की हत्या, कार्बाइन लूटी।
20 दिसंबर 2009- तत्कालीन मु यमंत्री मायावती के विशेष कार्य अधिकारी सीपी बिंद के गनर हेड कांस्टेबल रामलाल गोल्फ क्लब चौराहा स्थित जियामऊ चौकी के पास हत्या कार्बाइन लूटी

25 नव बर 2015- हाई कोर्ट के जज की सुरक्षा में लगे कांस्टेबल प्रमोद कुमार की गोमतीनगर में गोली मारकर सरकारी पिस्टल लूटी।

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