सावधान मिस्त्री खत्री…मोदी अखिलेश से निपटेगा सेवादल….यूपी कांग्रेस में बदलाव का आगाज़

| विशेष
mistry

लखनऊ, 05 नवंबर।यूपी में सत्ता के हाशिये की सिल्वर जुबली मना रही कांग्रेस को बदलाव की जरूरत है। लगातार लोकसभा विधानसभा में सिमटती पार्टी को पंचायत चुनाव में भी जीत के लाले ही पड़ गये…..पार्टी ने सबसे पहले सूबे में सेवादल का मुख्य संगठक बदला है। 7-8 सालों से सेवादल के मुखिया रहे प्रह्लाद द्विवेदी के हटाकर वाराणसी से प्रमोद पाण्डेय को नया मुख्य संगंठक बनाया गया है। युवा और तेज तर्रार दिखने वाले पाण्डे ने पहली ही प्रेस कांफ्रेंस में सेवादल को मजबूत और बढ़ाने की बात बाद में पहले मोदी और अखिलेश से निपटने की रूपरेखा तैयार कर ली। उनके तेवर से मोदी और अखिलेश को तो कम कांग्रेस के मिस्त्री ौर खत्री को जरूर सचेत होने की जरूरत है।

मूलरूप से वाराणसी के रहने वाले और सेवादल के राष्ट्रीय सचिव रहे प्रमोद पाण्डे को प्रदेश सेवादल की कमान सौंपी गई है। कमान मिलते ही सेवादल के दफ्तर की रंगत बदली गई और सेवादारों की संख्या बढ़ाने की खोज पड़ताल भी शुरू हो गई…नये सेवादल चीफ़ को मीडिया से भी मुखातिब कराया गया….प्रेस कांफ्रेंस में जितने सेवादल के लोग थे उतने ही मीडिया वाले भी। स्थानीय स्तर पर छपने वाले बड़े अखबारों को तो छोड़िये रीज़नल न्यूज़ चैनलों से भी किसी ने कांग्रेस में होने वाले इस बदलाव की खबर को महत्व नहीं दिया। चूंकि मै बरसों से कांग्रेस की कवरेज करता रहा हूं और हर छोटी बड़ी खबर को भी कांग्रेस के कायाकल्प से देखने की कोशिश करता हूं। मैने नये सेवादल मुखिया को याद दिलाया कि सालों से कांग्रेस का ये संघठन सिर्फ 26 जनवरी15 अगस्त को झंडा फहराने के वक्त ही दिखता है उसके बाद तो यदा कदा होने वाले पार्टी के धरना प्रदर्शन में भी सेवादल के लोग कहीं नजर नहीं आते….

एक जमाना था जब स्वर्गीय राजीव गांधी सेवादल की टोपी खुद लगाते थे और सेवादल को गांघी जी के बताये मुताबिक एक अलग पहचान दिलाने में लगे रहते थे। लेकिन राजीव के बाद पिछले 10 सालों की सत्ताकल में भी कांग्रेस हुक्मरानों ने सेवादल के लिये कुछ नहीं किया। यही वजह है कि यूपी में अब सेवादल का अस्तित्व ही सिर्फ नाम का बचा रह गया। पंचायत चुनावों में करारी शिकस्त झेल रही पार्टी को लगने लगा है कि पहले काम करने वाले कैडर बेस्ड संगठनों को मजबूत किया जाय, तब कहीं जाकर 2017 के विधानसभा चुनाव आते आते पार्टी किसी मुकाबले में खड़ी हो पायेगी।

तो चलो भाई प्रहलाद द्विवेदी की जगह प्रमोद पाण्डे की ताजपोशी को सेवादल की मजबूती के लिये मान लिया जाय तो संकेत साफ है कि जल्द ही यूपी कांग्रेस में भी बड़ा फेरबदल किया जायेगा। अपनी प्रेस कांफ्रेंस में प्रमोद के तेवर साफ कर रहे थे कि सेवादल के बहाने वो मोदी और अखिलेश सरकार के खिलाफ संगठन को लड़ने के लिये मजबूत करेंगे और प्रशिक्षण देकर सड़कों पर संघर्ष करने के लिये तैयार करेंगे, तो इस तरह तो यूपी कांग्रेस ने कोई योजना बनाई ही नहीं हां यदा कदा किसी ना किसी मुद्दे पर सरकार के खिलाफ बगावती तेवर दिखाती रही है, प्रमोद ने जो कहा उसका आधा भी करने में कामयाब हो गये तो तय मानिये कि हाईकमान उनसे सीख लेकर जल्द ही खत्री मिस्त्री की दीवार जरूर गिरा देगा…और यूपी में पार्टी की मजबूद दीवार खड़ी करने के लिये प्रमोद जैसे फौलादी इरादों वाले लोगों को काशी बनारस से निकालकर लखनऊ ले आयेगी।

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